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 भारतीय संविधान में कितनी अनुसूचिया है?



दोस्तो आपने भारतीय संविधान में अनुसूचियो के बारे में तो कभी न कभी सुना ही होगा लेकिन हम आज अनुसूचियो के बारे में विस्तार से जानेंगे की भारतीय संविधान में कितनी अनुसूचिया है और  संविधान लागू होने से पहले इसकी संख्या कितनी थी और इसे भारतीय संविधान में   क्यों जोड़ी गई है तो हम आज बात करेंगे हमारे संविधान की अनुसूचियों की इस पोस्ट को अंत तक देखे यह आपके किसी भी एग्जाम के लिए  हेल्पफुल रहेगी।



भारतीय संविधान में कितनी अनुसूचियां है?How many schedules are there in the Indian Constitution


भारत के मूल संविधान में पहले  8 अनुसूचिया थी लेकिन वर्तमान में भारतीय संविधान में 12 अनुसूचियाँ हैं। संविधान में 9वीं अनुसूची प्रथम संविधान संशोधन 1951, 10वीं अनुसूची 52वें संविधान संशोधन 1985, 11वीं अनुसूची 73वें संविधान संशोधन 1992 एवं बाहरवीं अनुसूची 74वें संविधान संशोधन 1992 द्वारा सम्मिलित किया गया है।



प्रथम अनुसूची: इसमें भारतीय संघ के घटक राज्यों (29 राज्य) एवं संघ शासित (सात) क्षेत्रों का उल्लेख है।


नोट:   संविधान के 69वें संशोधन के द्वारा दिल्ली को की राजधानी क्षेत्र का दर्जा दिया गया है।


द्वितीय अनुसूची:  इसमें भारत राज-व्यवस्था के विभिन्न पदाधिकारियों (राष्ट्रपति, राज्यपाल, लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, राज्य सभा के सभापति एवं उपसभापति, विधान सभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, विधान परिषद के सभापति एवं उपसभापति, उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों और भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक  आदि को प्राप्त होने वाले वेतन भत्ते का उल्लेख किया गया है। 


 नोट:   पदाधिकारियों के वेतन-भत्ते इन अनुच्छेदो के तहत दिए जाते है  59(3), 65(3), 75(6),97, 125,148(3), 158(3),164(5),186 ।



तृतीय अनुसूची:  इसमें विभिन्न पदाधिकारियों (राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, मंत्री, उच्चतम एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों) द्वारा पद-ग्रहण के समय ली जाने वाली शपथ का उल्लेख है।

यह अनुच्छेद 75(4),99, 124(6),148(2), 164(3),188 और 219] - व्यवस्थापिका के सदस्य, मंत्री,  न्यायाधीशों आदि के लिए शपथ लिए जानेवाले प्रतिज्ञान के प्रारूप दिए हैं।



  चौथी अनुसूची:   इसमें विभिन्न राज्यों तथा संघीय क्षेत्रों की राज्य सभा में प्रतिनिधित्व का विवरण दिया गया है. यह अनुच्छेद 4(1),80(2)] - राज्यसभा में स्थानों का आबंटन राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों से है।



पांचवीं अनुसूची:  इसमें विभिन्न अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजाति के प्रशासन और नियंत्रण के बारे में उल्लेख है यह अनुच्छेद 244(1) के तहद है।

छठी अनुसूची: इसमें असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम राज्यों के जनजाति क्षेत्रों के प्रशासन के बारे में प्रावधान है  छठी अनुसूची-अनुच्छेद 244(2), 275(1)] के तहत रखी गई है।



 सांतवी अनुसूची: इसमें केंद्र एवं राज्यों के बीच शक्तियों के बंटवारे के बारे में बताया गया है, इसके अन्तगर्त तीन सूचियाँ है- संघ सूची, राज्य सूची एवं सूची -


(1) संघ सूची इस सूची में दिए गए विषय पर केंद्र सरकार कानून बनाती है. संविधान के लागू होने के समय इसमें 97 विषय थे, वर्तमान समय में इसमें 98 विषय हैं।




(2)  राज्य सूची  इस सूची में दिए गए विषय पर राज्य सरकार कानून बनाती है. राष्ट्रीय हित से संबंधित होने पर केंद्र सरकार भी कानून बना सकती है. संविधान के  लागू होने के समय इसके अन्‍तर्गत 66 विषय थे, वर्तमान  में 62 विषय है।



(3) समवर्ती सूची इसके अन्‍तर्गत दिए गए विषय पर केंद्र एवं राज्य दोनों सरकारें कानून बना सकती हैं. परंतु कानून के विषय समान होने पर केंद्र सरकार  द्वारा बनाया गया कानून ही मान्य होता है. राज्य सरकार द्वारा बनाया गया कानून केंद्र सरकार के कानून बनाने के साथ ही समाप्त हो जाता है. संविधान के लागू होने के समय समवर्ती सूची में 47 विषय थे, वर्तमान समय में इसमें 52 विषय हैं.।

आठवीं अनुसूची:  इसमें भारत की 22 भाषाओँ का उल्लेख किया गया है. मूल रूप से आंठवीं अनुसूची में 14 भाषाएं थीं, 1967 ई० में सिंधी को और 1992 ई० में कोंकणी,मणिपुरी तथा नेपाली को आंठवीं अनुसूची में शामिल किया गया. 2004 ई० में मैथिली, संथाली, डोगरी एवं बोडो को आंठवीं अनुसूची में शामिल किया गया है यह अनुच्छेद 344(1), 351] के तहद्द है।



नौवीं अनुसूची: संविधान में यह अनुसूची प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम, 1951 के द्वारा जोड़ी गई. इसके अंतर्गत राज्य द्वारा संपत्ति के अधिग्रहण की विधियों का उल्लेख किया गया है. इन अनुसूची में सम्मिलित विषयों को न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है. वर्तमान में इस अनुसूची में 284 अधिनियम हैं।


 नोट:  अब तक यह मान्यता थी कि नौवीं अनुसूची में सम्मिलित कानूनों की न्यायिक समीक्षा नहीं की जा सकती. 11 जनवरी, 2007 के संविधान पीठ के एक निर्णय द्वारा यह स्थापित किया गया कि नौवीं अनुसूची में सम्मिलित किसी भी कानून को इस आधार पर चुनौती दी जा सकती है कि वह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है तथा उच्चतम इन कानूनों की समीक्षा कर सकता है।



दसवीं अनुसूची: यह संविधान में 52वें संशोधन, 1985 के द्वारा जोड़ी गई है. इसमें दल-बदल से संबंधित प्रावधानों का उल्लेख है ।



ग्यारहवीं अनुसूची:  यह अनुसूची संविधान में 73वें संवैधानिक संशोधन (1993) के द्वारा जोड़ी गई है. इसमें पंचायतीराज संस्थाओं को कार्य करने के लिए 29 विषय दिए गए हैं।



बारहवीं अनुसूची: यह अनुसूची 74वें संवैधानिक संशोधन (1993) के द्वारा जोड़ी गई है इसमें शहरी क्षेत्र की स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को कार्य करने के लिय 18 विषय प्रदान किए गए हैं।




दोस्तो जैसा कि हमने भारतीय अनुसूचियों के बारे में विस्तार से जाना है की हमारे भारतीय सविधान में कितनी  अनुसूचिया है। और किस अनुसूचियों में क्या निर्देश दिए गए है जो की सभी व्यक्ति के लिए लागू होते है  यदि आपको यह जानकारी पसंद आई होगी तो इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करे।



विश्व एड्स दिवस कब मनाया जाता है ?


क्या आपको पता है की विश्व एड्स दिवस  कब मनाया जाता है तथा इसकी शुरुआत किस देश से हुई और इसे क्यों मनाया जाता है तो इस पोस्ट में हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताएंगे क्योंकि बहुत लोगों को पता नहीं होता इसी कारण लोगो को जागरूक करने के लिए इसकी स्थापना की गई है तो आज बात करते है की विश्व एड्स दिवस क्यों मनाया जाता है।



विश्व एड्स दिवस कब मनाया जाता है ?



प्रतिवर्ष विश्व एड्स दिवस पूरे विश्व में 1 दिसम्बर को मनाया जाता है अगर बात करे विश्व एड्स दिवस की तो इसकी पहली बार कल्पना 1987 में थॉमस नेट्टर और जेम्स डब्ल्यू बन्न द्वारा की गई थी। थॉमस नेट्टर और जेम्स डब्ल्यू बन्न दोनों डब्ल्यू.एच.ओ.(विश्व स्वास्थ्य संगठन) जिनेवा, स्विट्जरलैंड के एड्स ग्लोबल कार्यक्रम के लिए सार्वजनिक सूचना अधिकारी थे। उन्होंने एड्स दिवस का अपना विचार डॉ. जॉननाथन मन्न (एड्स ग्लोबल कार्यक्रम के निदेशक) के साथ साझा किया, जिन्होंने इस विचार को स्वीकृति दे दी और वर्ष 1988 में 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस के रुप में मनाना शुरु कर दिया। उनके द्वारा हर साल 1 दिसम्बर को सही रुप में विश्व एड्स दिवस के रुप में मनाने का निर्णय लिया गया। 


प्रारंभ में विश्व एड्स दिवस को सिर्फ बच्चों और युवाओं से ही जोड़कर देखा जाता था परन्तु बाद में पता चला कि एचआईवी संक्रमण किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है इसके बाद साल 1996 में HIV/AIDS पर संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक स्तर पर इसके प्रचार और प्रसार का काम संभालते हुए साल 1997 में विश्व एड्स अभियान के तहत संचार, रोकथाम और शिक्षा पर कार्य करना शुरू किया।



एड्स का पूरा नाम क्या है ?  


एड्स का पूरा नाम एक्वायर्ड इम्यूलनो डेफिसिएंशी सिंड्रोम है ।


A - Acquired immune

D - Deficiency 

S - Syndrome

 और यह एक तरह का विषाणु है, जिसका नाम HIV (Human immunodeficiency virus) है।

इसका रेड रिबन एचआईवी पॉजिटिव लोगों के साथ एकजुटता और एड्स के साथ जी रहे लोगों के लिए वैश्विक प्रतीक होता है।

एड्स दिवस क्यों मनाया जाता है?

मालूम हो कि एड्स एक खतरनाक जानलेवा बीमारी है। यह बीमारी असुरक्षित यौन संबंधों की वजह से होता है। लिहाजा, इससे बचाव के लिए लोगों में जागरुकता फैलाने के लिए सरकार व निजी संस्थाओं की ओर से समय-समय पर किया जाता है ।


विश्व एड्स दिवस पूरे विश्व में 1 दिसम्बर को लोगों को एड्स के बारे में जागरुक करने के लिये मनाया जाता है। एड्स ह्यूमन इम्यूनो डेफिशियेंसी (एचआईवी) वायरस के संक्रमण के कारण होने वाला महामारी का रोग है। संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति ने साल 1995 में विश्व एड्स दिवस के लिए एक आधिकारिक घोषणा की थी, जिसके बाद से दुनिया भर में विश्व एड्स दिवस मनाया जाने लगा ।


आपको बता दूं कि कही मशहूर एक्ट्रेस भी AIDS का शिकार,बनी है जिससे बहुती की  मौत हुई है ।

एड्स से बचाव के लिए टीकाकरण करवाने को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए इस दिन विशेष कार्यक्रमों का आयोजन होता है। पूरी दुनिया में विश्व टीकाकरण दिवस इसलिए भी मनाया जाता है ताकि एड्स जैसी बीमारी के लिए वैक्सीन की खोज करने वाले वैज्ञानिकों को धन्यवाद दिया जा सके।

एड्स कैसे फैलता है?


एड्स पहलने का कारण अगर एक सामान्य व्यक्ति एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के वीर्य, योनि स्राव अथवा रक्त के संपर्क में आता है तो उसे एड्स हो सकता है। आमतौर पर लोग एच.आई.वी. पॉजिटिव होने को एड्स समझ लेते हैं, जो कि गलत है। बल्कि एचआईवी पॉजिटिव होने के 8-10 साल के अंदर जब संक्रमित व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता क्षीण हो जाती है तब उसे घातक रोग घेर लेते हैं और इस स्थिति को एड्स कहते हैं। एड्स ज्यादातर चार माध्यमों से होता है। 


एच.आई.वी से संक्रमित लोगों में लम्बे समय तक एड्स के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। लंबे समय तक (3, 6 महीने या अधिक) एच.आई.वी. का भी औषधिक परीक्षण से पता नहीं लग पाता। अधिकतर एड्स के मरीजों को सर्दी, जुकाम या विषाणु बुखार हो जाता है पर इससे एड्स होने का पता नहीं लगाया जा सकता।



एड्स से कैसे बचाव करे?


पीड़ित साथी या व्यक्ति के साथ यौन सम्बन्ध स्थापित नहीं करना चाहिए, अगर कर रहे हों तो सावधानीपूर्वक कंडोम का प्रयोग करना चाहिए। लेकिन कंडोम इस्तेमाल करने में भी कंडोम के फटने का खतरा रहता है। अपने जीवनसाथी के प्रति वफादार रहें, एक से अधिक व्यक्ति से यौन संबंध ना रखें।

एड्स पीडित महिलाएं गर्भधारण न करें, क्‍योंकि उनसे पैदा होने वाले‍ शिशु को यह रोग लग सकता है।


एड्स के उपचार में एंटी रेट्रोवाईरल थेरपी दवाईयों का उपयोग किया जाता है। इन दवाइयों का मुख्य उद्देश्य एच.आई.वी. के प्रभाव को काम करना, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना और अवसरवादी रोगों को ठीक करना होता है।  दाढ़ी बनवाते समय हमेशा नाई से नया ब्लेड उपयोग करने के लिए कहना चाहिये। 



उम्मीद है की इस पोस्ट में  आपको जानकारी मिल गई होगी की विश्व  एड्स दिवस कब मनाया जाता है, और यह क्यों मनाया जाता है , तथा इसकी शुरूआत कहा हुई और एड्स से कैसे बचे, यदि आपको हमारी यह जानकारी पसंद आई हो तो इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर जरूर शेयर करें।


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