लाखामंडल

 



1.  लाखामंडल उत्तराखंड के देहरादून के जौनसार बावर क्षेत्र में स्थित है यहां मूर्तियों का भंडार है।




2. लाखामंडल यमुना वह रिखनाड नदी के संगम पर स्थित है महाभारत काल में बना लक्षागृह भी यहीं स्थित है।



3. लाखामंडल उत्तराखंड शैली का बना प्राचीन शिव मंदिर है ऐसा माना जाता है की  इस मंदिर शिवलिंग में जल प्रभावित करने पर अपना प्रतिबिंब दिखाई देता है।



4. यहां पर  दो अलग शिवलिंग है जिसमें द डार्क ग्रीन दापर  यूग तथा लाल शिवलिंग त्रेता युग से संबंधित है।


5. लखामंडल का पुराना नाम मढ था।



6. लाखामंडल अपनी प्राचीन अवशेषों से गिरा हुआ है माना जाता है कि यहां प्रार्थना करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिल जाती है।



7. लाखामंडल से राजकुमारी ईश्वरा का लेख  प्राप्त हुआ है जिसमें यहां एक शिव मंदिर के निर्माण की पुष्टि हुई है यह छगलेश की राजकुमारी थी।



8. यह समुद्र तल से 1372 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।



9. यहां पर दो शिवलिंग अलग-अलग रंगों में है कहा जाता है कि लाल शिवलिंग त्रेता युग से संबंधित है जब भगवान  राम का जन्म हुआ था और डंडार शिवलिंग भगवान् श्रीकृष्ण से संबंधित है।



10. मंदिर के अंदर पार्वती के पैरों के निशान एक चट्टानों पर देखे जा सकते हैं जो इस मंदिर की विशेषता है।



11. लाखामंडल में भगवान, कार्तिक विष्णु, हनुमान की मूर्तियां मंदिर में  स्थापित है।



12. लाखामंडल मंदिर 128 किलोमीटर देहरादून से और 35 किलोमीटर मसूरी से है।



13. माना जाता है कि यहां पर शिवरात्रि के दिन जो भी श्रद्धालु आता है उनकी इच्छा पूरी हो जाती है।



14. मंदिर के प्रांगण में दो मूर्तिया है जो छः फुट लम्बी है जिसे द्वावारीरूप के नाम से भी  जाना जाता है ।



15. यह  माना जाता है कि लाखामंडल मंदिर का निर्माण युधिष्ठिर ने किया था।



16. लाखामंडल प्राचीन काल मंदिर है यहां से पांडुव  चित्रेश्वर नामक गुफा   से बाहर निकले थे।



17. कहा जाता है कि दुर्योधन ने पांडवों को मरने के  लिए यहां  लक्षागृह बनाया था किन्तु भगवान शिव और पार्वती की कृपा से वह गुफा से सुरक्षित बाहर निकले थे।

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